Asim Bakshi

ऐ दिल झूम ले ज़रा

ऐ दिल झूम ले ज़रा
अभी तो सफर की इब्तेदा हुई है
जान पेहछान पक्की हुई है
दिलसे दिलकी राह मिली है
58 की उम्र भी कोई उम्र है
अभी तो धड़कने जवान हुई है

ऐ दिल झूम ले ज़रा
अभी तो मंज़िलें दिखी है
कोई अच्छी ग़ज़ल लिखी है
बारिशे मन को लुभा रही है
शरारतें सुई चुभा रही है
क्यों सोचता है कल का
अभी साँसे जवाँ हुई है

ऐ दिल झूम ले ज़रा
अभी तो कितनी बातें कहनी है
कितनी बातें सुननी है
दोस्त मिल बैठेंगे इतवार को
रज़ा की मज़ा लेनी है
लुत्फ़ बचपन और जवानीका
उम्र को गवाही देनी है

ऐ दिल झूम ले ज़रा
अभी और एक खत लिखना है
एक जवाब और पढ़ना है
कोई गुलाब ढूंढ ला
किताबों के बिच रखना है
वख्त की अब पाबंदी नहीं
इंतज़ार का मज़ा चखना है !!

-आसिम !!

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