Asim Bakshi

तुम कमाल करते हो

कभी पलकें झुका कर
बेहाल करते हो
कभी नज़रें मिलाकर
सवाल करते हो
तुम्हारा क्या कहना
तुम कमाल करते हो

कभी होंठो पर
खामोशियाँ रखते हो
कभी इशारो से
हमें तकते हो
तुम्हारा क्या कहना
तुम कमाल करते हो

कभी इंकार करते हो
कभी इकरार करते हो
कभी खुद मचलते हो
कभी बेकरार करते हो
तुम्हारा क्या कहना
तुम कमाल करते हो

कभी आहें भरते हो
कभी साँसे भरते हो
कभी परवाह नहीं करते
कभी खुद से डरते हो
तुम्हारा क्या कहना
तुम कमाल करते हो

कभी बेपनाह बरसते हो
कभी एक बूँद के लिए तरसते हो
कभी आँखों में नमी
कभी खुलकर हँसते हो
तुम्हारा क्या कहना
तुम कमाल करते हो !!!

-आसिम !!

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