Dr. Akhtar Khatri

मैं तुमसे बात करूँ या ना करूँ

मैं तुमसे बात करूँ या ना करूँ,
प्यारभरी रात करूं या ना करूँ ।

याद रखो तुम मेरे कण कण में हो,
तुम्हे फ़िर याद करूँ या ना करूँ ।

ज़रूरी जब होगा, तुम आओगे,
तुम्हे कभी साद करूँ या ना करूँ ।

मेरी ज़िन्दगी सिर्फ़ तुम्हारी ही है,
इश्क़ का इज़हार करूँ या ना करूँ ।

प्यारे ही इतने हो तुम ‘अख़्तर’ को,
वारी मेरी ज़ात करूँ या ना करूँ ।

-अख़्तर खत्री

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