Asim Bakshi

लगाए बैठे है आस

कुछ ताज़ी सांस
कुछ दोस्त आसपास
झूमता हो सावन
चाय की हो प्यास

धून बजती हो सुहानी
उसमे भी लताजी ख़ास
हर चेहरे पर हो ख़ुशी
नहीं दिखे कोई उदास

उड़ती हो तितलियाँ
भीगी भीगी हो घास
गिरती हो बरसाती बूंदे
मन को लगे हाश

दुवा करते है खुदा से
ऐसे दिन अब आये काश
ज़िन्दगी फिर ज़िंदा हो
लगाए बैठे है आस !!!

-आसिम !!!

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