Asim Bakshi

आये थे

बिलकुल बेफिकर थे जब तुम पहली बार कॉलेज आये थे,
white top और denim jeans में तुम गज़ब ढाये थे। 

मासूम सा चेहरा रंग गुलाबी और हलकी सी मुस्कान लिए आये थे,
शर्म से नज़रे झुकी थी , क्या करना तुम समझ नहीं पाये थे। 

तुम से खूबसूरत ना देखी थी ना कभी सोच पाये थे,
हुस्न परी का रुतबा देने लब मेरे थर थराये थे। 

बेबाक से हो गए थे देखकर तेरा हसीं चेहरा,
ना कुछ समझ पाये थे ना कुछ बोल पाये थे। 

पहले साल की पहली बारिश साल हर साल याद रहेगी, 
जब कॉलेज के गेट से भीगते हुए तुम क्लास रूम में आये थे। 

एक एक बूँद बिखरे मोती की माला के जैसे सरकती जा रही थी,
उसी जगह पर हम ठहर गए जहा तुम ज़ुल्फ़ें झटककर आये थे। 

गर होता मेरी आँखों का आइना और तुम करते खुदका मुआइना, 
कसम खुदा की इतने करीब होने के मौके कभी नहीं आये थे !

-आसिम !!

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