Asim Bakshi

नहीं मिलता वोह लड़का

नहीं मिलता वोह लड़का जिससे में ब्याह के आयी थी —

शरारती था मोजिला था अब उलझा उलझा सा रहता है —

खेलता था बारिशो के पानी से अब हिसाब में डूबा रहता है —

अटखेलियों से बैठता था डाइनिंग टेबल पर अब सर झुका कर खा लेता है —

लाता था फूलो के गुंचे अब फाइलों को उठाता रहता है —

वीक एन्ड पर लॉन्ग ड्राइव होती थी अब शार्ट टेम्पर सा हो गया है

लाता था मनभावन साड़िया अब अनदेखी का शिकार हो गया है

खेलता था मेरी ज़ुल्फ़ों से अब उंगलियों पे हिसाब गिनता है —

बदल गया है मेरा सनम जो मेरा सनम होता था !!

-आसिम !!!

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