Poems / कविताए

पूछो इन जीत से तेरी रज़ा क्या है ।

खुली आंख से सपने सज़ा लो,
इन ख्यालो में बसा क्या है ।

अथक परिश्रम तुम कर लो,
इन चापलूसी में रखा क्या है ।

भटको मत, लक्ष्य का पीछा करो,
मंजिल से पूछो तेरा पता क्या है ।

राहें बनती – बिगड़ती जायेगी,
पगडंडियों से घबराना क्या है ।

उड़ते रहो उन्मुक्त परिंदे की तरह,
पंछी से पूछो इतराना क्या हैं ।

हर तरफ से रुख मोड़ लो अपनी ओर,
हवाओ से पूछो तेरी दिशा क्या है ।

पहुंच जाओ उन शिखर तक,
अब चट्टानों से टकराना क्या है ।

थको मत, रुको मत, हिम्मत न हारो,
पूछो इन जीत से तेरी रज़ा क्या है ।

 

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