Dr. Akhtar Khatri

रोशन है

तसव्वुर से उस के मेरा आशियाँ रोशन है,
जैसे की इस सेहरा में एक दरिया रोशन है ।

कल की फ़िक्र क्यूं करेगा, अंधेरों में भी वो,
उस गरीब के चूल्हे में तो आसमां रोशन है ।

पुकार लेती है अपनी मां को अक्सर दर्द में,
दुल्हन के दिल में अब भी मायका रोशन है ।

भटक गया फ़िर भी भटकेगा नहीं मुसाफ़िर,
हर कदम पर रास्ते पर वो कारवाँ रोशन है ।

ज़ुबान पर सच्चाई, दिल में न डर किसी का,
‘अख़्तर’ रोम रोम में मेरा ख़ुदा रोशन है ।

#अख़्तर

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