Dr. Akhtar Khatri

तू बता किधर है ?

तेरे लबों को छू के आनेवाली हवाओं का असर है,
तब ही से यह मेरे अपने लब जाने क्यों बेसबर है ।

इन भूरी आँखों ने दीवाना बना दिया देखते ही,
मैं रहता हूँ इन में सदियों से, यही तो मेरा घर है ।

घनी काली ज़ुल्फ़ों के साए में गुज़रेगी ज़िन्दगी,
कितना सुकून है यहाँ, जैसे कोई प्यारा शज़र है ।

क्यों ढूंढू अब कहीं और मेरी मुहब्बत को मैं,
तेरा दिल जो है वही तो मेरे सपनों का शहर है ।

राहत सिर्फ़ तेरे साथ में होने से मिलती है ‘अख़्तर’,
आ की बैठा हूँ इंतेज़ार में तेरे, तू बता किधर है ?

#अख़्तर_खत्री

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