Poems / कविताए

मैं पैसा हूँ…..

मैं पैसा हूँ…..
एक निर्जीव वस्तु…..

आप मेरी तरफ देखो तो मैं आपकी तरफ देखता भी नहीं……..फिर भी आपके पास हूँ तो सब आपको देखते हैं………।

आप मुझसे बात करो तो मैं आपसे बात भी नहीं करता……. मगर मैं आपके पास हूँ तो सब आपके साथ बात करते हैं………।

मैं आपके पास हूँ तो आपका हूँ…. आपके पास नहीं हूँ तो आपका नहीं हूँ …मगर मैं आपके पास हूँ तो सब आपके हैं…….।

मैं कुछ भी नहीं हूँ मगर मैं निर्धारित करता हूँ …….कि लोग आपको कितनी इज्जत देते है…….।

मैं भगवान् नहीं…..मगर लोग मुझे भगवान् से कम नहीं मानते……..।

मैं बोलता नहीं….मगर सबकी बोलती बंद करवा सकता हूँ…….।

मुझे आप मरने के बाद ऊपर नहीं ले जा सकते…… मगर जीते जी मैं आपको बहुत ऊपर ले जा सकता हूँ…….।

मुझ में बहुत ताकत है…. मगर फिर भी बहुत सीमितताएं भी है…..
कभी आप सोच कर देखिये क्या आप सच में मुझसे प्यार करते हैं…..नहीं कोई मुझसे प्यार नहीं करता वो सर्फ मुझे इस लिए पसंद करते हैं……क्योकि मैं एक साधन हूँ उनकी खुशियों का…….।
मैं सिर्फ जरुरत के समय पैसा हूँ ……फिर बस एक कागज़ का टुकड़ा हूँ……..।

सिर्फ मुझे पाकर कोई खुश रहता तो शायद बिल गेट्स दुनिया का सबसे खुस इंसान होता……।

मैं नमक की तरह हूँ जो जरुरी तो है…… मगर जरुरत से ज्यादा हो तो जिंदगी का स्वाद बिगाड़ देता है…..।

मैं सारे फसाद की जड़ हूँ…..मगर फिर भी न जाने क्यों सब मेरे पीछे इतना पागल हैं…….।

इतिहास में कई ऐसे उदाहरण मिल जाएंगे जिनके पास मैं बेसुमार था..
मगर फिर भी वो मरे..और रोने वाला कोई नहीं था…….।

मुझे पसंद करो सिर्फ इस हद तक की लोग आपको नापसन्द न करने लग……।

मैं पैसा हूँ …………………….

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