Poems / कविताए

तुजे कहेने को तो बहोत कुछ है, पर बताने को अल्फाज कहा से लाउ

तुजे कहेने को तो बहोत कुछ है, पर बताने को अल्फाज कहा से लाउ
यु तो जीने की वजह बहोत है दुनियामे,
प्यार तुज से क्यों है क्या वजह बताऊ
जब से माना तुजे अपना न में अपनी रही न दिल अपना
दिल को तुज से दूर भी ले जाऊ तो कैसे उसे समजाऊ
मजबूरिया तो बहोत है जहामे जो तुज से प्यार करने से रोके,
पर इस दिल को कैसे मनाऊ
तू ही बता तुजे कैसे मे भूल जाऊ.
कोई आसन सा तरीका जो हो पास तेरे ,
कहे दे मुझे भी जो आसानी से मे भी जी पाउ…

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